जरूरी सावधानियों और देखभाल के तरीकों में हाथ धोना, स्तनपान, सिर और गर्दन का समर्थन, नाभि की देखभाल, संक्रमण से बचाव और टीकाकरण इत्यादि आते हैं । शिशु को हमेशा पीठ के बल (सीधा) सुलाएं। सोने की जगह पर कोई भारी कंबल या तकिया न रखें ।
प्रोस्टाग्लैंडीन हॉर्मोन के कारण गर्भाशय की मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती हैं, जिससे ऐंठन और दर्द पैदा होता है। गर्भाशय अपनी अंदरूनी परत (lining) को बाहर धकेलने के लिए दबाव बनाता है। एंडोमेट्रिओसिस में गर्भाशय के बाहर टिशू बढ़ने लगते हैं, जिससे बहुत तेज और असहनीय दर्द होता है। बच्चेदानी में होने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठें फाइब्रॉएड भी दर्द का कारण बन सकती हैं।
ट्यूब ब्लॉकेज की जांच: यह देखने के लिए कि फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या बंद हैं। गर्भाशय का आकार: यूट्रस का आकार और संरचना सामान्य है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए। बांझपन (Infertility): यदि गर्भ नहीं ठहर रहा है, तो उसके कारणों का पता लगाने के लिए यह सलाह दी जाती हैं।
प्रेगनेंसी में कमर दर्द का मुख्य कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव (रिलैक्सिन हार्मोन), वज़न बढ़ना, गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदलना (Center of Gravity), कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, गलत पोस्चर (मुद्रा) इत्यादि हैं |
पीसीओडी (PCOD) को पूरी तरह से ठीक या नियंत्रित करने के लिए संतुलित और फाइबर युक्त भोजन, प्रोसेस्ड फूड से परहेज, नियमित एक्सरसाइज, वजन नियंत्रण, पूरी नींद लें, हाइड्रेशन और जीवनशैली, खान-पान में सुधार करना आदि सबसे प्रभावी तरीके है।
अधिकांश गर्भपात गर्भावस्था के पहले 12 से 13 सप्ताह के भीतर यानी पहली तिमाही में होते हैं। इसका सबसे आम कारण भ्रूण में गुणसूत्रों (Chromosomes) की असामान्यता या गड़बड़ी होना है, जिससे बच्चे का सही विकास नहीं हो पाता। इसके अलावा हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड, संक्रमण या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं |